शनि साढ़ेसाती क्या होती है – 7.5 साल का पूरा सच और उपाय
शनि देव का परिचय:
शनि देव को कर्मफल दाता कहा जाता है। व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार शनि फल देते हैं। कुंडली में शनि का स्थान और बल जीवन में संघर्ष, अनुशासन, सफलता और स्थिरता को दर्शाता है। शनि साढ़ेसाती को लोग भय के रूप में देखते हैं, जबकि वास्तव में यह जीवन सुधार की परीक्षा होती है।
? शनि साढ़ेसाती क्या होती है?
जब शनि देव जन्म राशि से बारहवीं, जन्म राशि और उससे दूसरी राशि में गोचर करते हैं, तब शनि साढ़ेसाती प्रारंभ होती है।
कुल अवधि – साढ़े सात वर्ष
इसी कारण इसे साढ़ेसाती कहा जाता है।
शनि साढ़ेसाती के तीन चरण:-
1. पहला चरण (आरंभिक)
◦ मानसिक तनाव बढ़ता है
◦ खर्च अधिक होते हैं
◦ काम में विलंब और भ्रम
2. दूसरा चरण (मध्य – सबसे कठिन)
◦ नौकरी, व्यापार और विवाह में परेशानी
◦ स्वास्थ्य कमजोर
◦ कर्मों का त्वरित फल
3. तीसरा चरण (अंतिम)
◦ परिस्थितियों में सुधार
◦ मेहनत का फल मिलना
◦ जीवन में स्थिरता
शनि साढ़ेसाती के प्रमुख लक्षण:-
◦ बार-बार रुकावटें
◦ धन टिकता नहीं
◦ रिश्तों में दूरी
◦ अकेलापन और चिंता
◦ हड्डी, जोड़, नसों की समस्या
ध्यान दें: साढ़ेसाती का प्रभाव हर व्यक्ति पर समान नहीं होता, यह कुंडली में शनि की स्थिति पर निर्भर करता है।
क्या शनि साढ़ेसाती हमेशा अशुभ होती है?
- नहीं
यदि कुंडली में शनि शुभ और बलवान हो तो:
• व्यक्ति ऊँचे पद तक पहुँचता है
• अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ता है
• स्थायी सफलता मिलती है
कई सफल लोगों का उत्थान शनि साढ़ेसाती के समय ही हुआ है।
शनि साढ़ेसाती के शांति उपाय:-
? 1. शनिवार के उपाय
सरसों के तेल का दान
काले तिल या काले वस्त्र दान
? 2. शनि मंत्र
“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”
शनिवार को 108 बार जप करें।
? 3. हनुमान जी की उपासना
मंगलवार और शनिवार हनुमान चालीसा
भय और नकारात्मकता दूर होती है
? 4. कर्म सुधार
सत्य और ईमानदारी अपनाएँ
माता-पिता व गरीबों का सम्मान करें
साढ़ेसाती में क्या न करें:-
• गलत रास्ते से धन
• छल-कपट
• अहंकार
• दूसरों को कष्ट
निष्कर्ष:- शनि साढ़ेसाती दंड नहीं बल्कि जीवन को मजबूत बनाने की प्रक्रिया है। जो व्यक्ति धैर्य, परिश्रम और सच्चाई अपनाता है, उस पर शनि देव विशेष कृपा करते हैं।
AstroKamal सुझाव: सटीक प्रभाव जानने के लिए व्यक्तिगत कुंडली विश्लेषण आवश्यक है।