शादी में देरी के 7 कुंडली कारण – क्या आपकी कुंडली भी यही संकेत दे रही है?

1 month ago
आज के समय में बहुत से लोग एक ही सवाल से परेशान रहते हैं – “सब कुछ ठीक है, फिर भी शादी क्यों नहीं हो रही?” रिश्ते आते हैं, बात चलती है, लेकिन ऐन मौके पर कुछ न कुछ अटक जाता है। कई बार लोग इसे किस्मत या हालात मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शादी में देरी के पीछे कुंडली में छिपे कुछ खास कारण होते हैं। आइए जानते हैं शादी में देरी के 7 प्रमुख कुंडली कारण, आसान और दिल से जुड़ी भाषा में। 1: सातवें भाव (7th House) का कमजोर या पीड़ित होना- कुंडली का सातवां भाव सीधे-सीधे विवाह से जुड़ा होता है। अगर इस भाव में शनि, राहु, केतु या मंगल जैसे क्रूर ग्रह बैठे हों या इस पर उनकी दृष्टि हो, तो: • रिश्ता तय होते-होते टूट जाता है • बात आगे नहीं बढ़ पाती • बार-बार रुकावटें आती हैं 2: शनि ग्रह का प्रभाव-शनि को देरी का ग्रह कहा जाता है। अगर शनि सातवें भाव में हो या सातवें भाव के स्वामी पर उसकी दृष्टि हो, तो शादी देर से होती है। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि शनि देर देता है, इनकार नहीं। ऐसी शादी अक्सर स्थायी और जिम्मेदारी वाली होती है। 3: मांगलिक दोष- यदि मंगल पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो मांगलिक दोष बनता है। इसके कारण: • परिवार की सहमति में देरी • रिश्ता बार-बार रुकना • अनबन या गलतफहमी सही मिलान और उपाय से इस दोष का प्रभाव काफी कम किया जा सकता है। 4: राहु–केतु का विवाह भाव से संबंध- राहु और केतु भ्रम और असमंजस पैदा करते हैं। इनका प्रभाव होने पर व्यक्ति: • शादी के फैसले में उलझन महसूस करता है • सही साथी चुनने में गलती कर बैठता है • मन होते हुए भी निर्णय टालता रहता है अक्सर लोग कहते हैं – “मन ही नहीं बन रहा शादी का”। 5: शुक्र ग्रह का कमजोर होना- शुक्र ग्रह प्रेम, आकर्षण और विवाह का कारक है। यदि शुक्र ग्रह: • अस्त हो • पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो व्यक्ति भावनात्मक रूप से तैयार होने के बावजूद शादी में देरी करता है। 6: सही दशा–अंतर्दशा का न चलना- कई बार कुंडली में विवाह योग होता है, लेकिन सही समय नहीं चल रहा होता। शादी के योग तब सक्रिय होते हैं जब: • सातवें भाव के स्वामी की दशा • शुक्र या गुरु की अनुकूल दशा चलती है। इसीलिए कुछ लोगों की शादी अचानक तय हो जाती है। 7:  पूर्व जन्म के कर्म और आध्यात्मिक कारण- केतु, आठवां या बारहवां भाव यह दर्शाता है कि: • पिछले जन्म के रिश्तों के कर्म अधूरे रह गए • इस जीवन में धैर्य और आत्मिक सीख जरूरी है ऐसे मामलों में आध्यात्मिक उपाय बहुत असरदार होते हैं। जरूरी  समझें- शादी में देरी का मतलब यह नहीं कि शादी नहीं होगी। हर कुंडली में समाधान छिपा होता है, बस उसे सही तरीके से समझना जरूरी है। यदि आप जानना चाहते हैं: - आपकी शादी कब होगी - देरी का असली कारण क्या है - कौन-से सरल उपाय आपके लिए सही हैं तो व्यक्तिगत कुंडली विश्लेषण अवश्य कराएं। ✨ जब ग्रह अनुकूल होते हैं, तो सही रिश्ता खुद रास्ता ढूंढ लेता है।